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Monday 18 December 2017
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फकीर की फिरकी से धूमल धूमिल

(दीपक “साहिल “ सुन्द्रियाल) २३ जून १९३४ को शिमला जिले के सरहन में जन्मे वीरभद्र सिंह का राजनेतिक जीवन बोलीवुड की किसी हिट स्टोरी से कम नहीं है| अपने राजनेतिक जीवन के ५० वर्ष पुरे कर चुके वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर रह पञ्च मर्तबा सफलतापूर्वक सरकार चलने का अनुभव रखते है| वीरभद्र सिंह ८ अप्रेल १९८३ को पहेली बार मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश पद पर आसीन हुए तद्पश्चात वर्ष १९९३,१९९८, व २००३ को सता पर कांग्रेस को काबिज करने का श्रय भी उनको जाता है| २५ दिसम्बर २०१२ को एक बार फिर मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश की कमान सम्भालने के साथ ही वीर भद्र सिंह अपनी राजनेतिक पारी का सिक्सर मरने जा रहे है | विपक्ष व अपनी ही पार्टी की आलोचनाओ के कई मर्तबा शिकार बने वीरभद्र सिंह, हर बार बेदाग होकर फ़िल्मी नायक की तरह वापस आये और समीकरण ही बाद डाले| कभी कत्तथा केस कभी सी.डी. केस में फसे, पर खुद को बेदाग साबित करने में सफल हुए| भले ही उनपर भ्रस्ताचार के आराप लगे परन्तु उनकी लोकप्रियता में कभी कोई कमी नहीं आई|

वीरभद्र के अनुसार यदि आप जनता को प्यार करते है तों जनता का प्यार आप पर बरसेगा और होता भी यही आया, जब जब वीरभद्र सिंह का नाम किसी मामले में आया जनता ने सिरे से उसे नकार दिया| वीरभद्र सिंह ने आपने इस राजनेतिक सफर में बहुत बुरा समय भी देखा जब आपने ही संघठन व आलाकमान से उपेक्षा झलनी पड़ी| एक समय अटकलों का बाज़ार गरम था की यह वीरभद्र की राजनीती का अंत है ,पर अनुभवी वीरभद्र सिंह हर राजनैतिक षड्यंत्र को भेदने में सफल रहे| केन्द्र के मत्वपूर्ण पदों पर रह कर हिमचल का गौरव बढआया, ४ बार कांग्रेस अध्यक्ष रहे|

नाटकीय घटनाक्रम के चलते केन्द्र से वापिस हिमांचल आये २४ अगस्त २०१२ को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेठी के अध्यक्ष बने| यह वह समय था जब धूमल सरकार की उपल्भादियाँ व कांग्रेस की अंतर्कलह के बिच दूर दूर तक कांग्रेस की हिमाचल में वापसी दिखाई नहीं दे रही थी, परन्तु वन मेंन आर्मी वीरभद्र सिंह ने अकेले ही स्टार प्रचारक की भूमिका अदा की| अपनी लगभग ९० जनसभाओ में धूमल को धूमिल कर पासा ही पलट कर रख दिया वीरभद्र सिंह जहां भी गए जनता ने सर आँखों पे बिठाया, बकौल समर्थक…उनका नेता जन्म से राजा आवश्य है, परन्तु आदाये फकीरों सी रखता है ये सता में हो या विपक्ष में, जो इस के पास गया कभी न-उम्मीद होकर नहीं लौटा| फकीर की फिरकी कुछ यूँ चली की बी.जे.पि. का गढ मने जाने वाले जिला कांगड़ा से बी.जे.पि का सुपडा साफ़ कर गई आपर हिमाचल व् लोआर हिमाचल की बात करने वालो को करारा झटका लगा| धूमल सरकार बार बार अपनी जीत के दावे कर रहे थी पर परिणाम चोकाने वाले निकले| दिगज हारे, नए चेहरे सामने आये, ढाई महीने की उठा पटक में अनुभवी वीरभद्र ने बजी मार ली| फकीर की फिरकी …राजा की सादगी जो भी हो जनता ने कांग्रेस का हाथ थामा वहीँ राजा वीरभद्र सिंह ने छटी बार मुख्यमंत्री का पद झटक कर उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया जो इसे अंत कह रहे थे, अभी तों यही लग रहा है की ये एक नई शुरुआत है…आगाज है वीरभद्र के नए आयाम छूने का और हिमाचल प्रदेश में बने ये नए राजनेतिक समीकरण प्रदेश को प्रगति पथ पर कहाँ तक ले जाते है जनता को इसका इंतज़ार रहेगा…अभी का सच तों यही है धूमल को धूमिल कर फकीर की फिरकी ने छका मार दिया हैl



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