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Wednesday 13 December 2017
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सच-‘इन’ …..सच-‘आउट’

दीपक: बेहद भावुक पल …वक्त रुका भी …सहमा भी और गुजर भी गया | 24 साल का बेहतरीन सफर या यूँ कहे 24 साल की तपस्या | कुछ साल जो दुनिया ने देखे और अनेको साल जो दुनिया ने नहीं देखे| वो 24 साल जिन्हें याद करते ही लगता है जैसे कल की ही बात हो | एक शक्स जो जन्मा तों सिर्फ क्रिकेट के लिए …बोला तों सिर्फ क्रिकेट और जिया तों सिर्फ क्रिकेट, और जिया भी क्या जिया …लोग़ कहते है उसने राज किया पर मुझे लगता है राज करना शब्द इस महान शक्स की शक्सियत को सूट नहीं करता क्यूंकि राज करने के लिए विरोधियों को हराया जाता है पर उसने किसी को कभी हराया नहीं जीता तों दिल जीता, मैदान में 24वर्षों तक उन सब का जो उसके साथ थे और उनका भी जो उसके विरुद्ध थे, उन सबका जिनके फैसले उसके पक्ष में थे और उनका भी जिनके फेसले उसके खिलाफ थे…गलत थे |

खेल को सम्मान देना क्या होता है उस कला का ये शकस महारथी रहा | 24 साल …सेंकडो आये.. सैकडो गए, कभी जीत का स्वाद चखा कभी हार के कड़वे पल, कभी दर्शको का बे-इंत्तहा प्यार, कभी घिनोना तिरस्कार पर क्या कभी अपने इस इन्सान के माथे पर शिकन देखि ? शायद यूँ ही इस इन्सान को क्रिकेट का भगवान नहीं कहते | सभी ने इसके वक्तित्व को आंकडो से तोला …शतक ..अर्द शतक. मैच ..कैच ..जीत …हार पर क्या कभी अपने सोचा की 24 साल तक मिडिया की सुर्ख़ियों में रहे किसी शकस का इतना सरल व साधारण बने रहना कितना असाधारण … है? भद्र पुरषओ के इस खेल में भद्रता के सही मायने सचिन की इस पारी ने समझाए |

स्थिति पक्ष में हो या विरुद्ध ..गेंद का सम्मान …पिच का सम्मान …खेल का सम्मान कैसे होता है मार्गदर्शक सचिन बने | सचिन ने दिखाया की अम्पयार को कैसे सम्मान दिया जाता है इस 24 वर्ष के लंबे समय में अनेको बार ऐसे मोक्के आये जब अंपायर के फेसले शायद गलत भी रहे और सचिन से बेहतर ये कौन जानता था पर क्या आपने सचिन को कभी झिलाते हुए देखा ? आँखे देखते …तेवर देखते ..अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते …नहीं, शायद याद भी करे तों 24वर्षों में ऐसा कोई पल नहीं याद आता जब क्रिकेट के इस भगवान के व्यवहार पर आपको खेद हुआ हो, चाहे जब शीर्ष पर हो …या बुरे दौर में सचिन …सचिन रहा ये सच-ईन वो सच है जो सरल है साधारण है पर सुद्रिड है ,जिस पर परिस्थितयों का असर नहीं …प्रशंशा से न अति-उत्साह, आलोचनाओ से न झिल्ह्ट | एक सच जिसने क्रिकेट के सिवा कुछ नहीं देखा, जिसे न तों रिकार्ड प्रसन्न करते है न उम्र विचलित जिसे बल्ले के सिवा दुनिया में शायद ही कुछ पसंद आता हो, 22 गज की पिच के आगे कुछ देखता हो | अपनी टेस्ट क्रिकिट की आखरी पारी के अवसर पर जब सचिन बोल रहे थे तों उनका रुदित कंठ उनके क्रिकेट के प्रति असीम सम्मान व प्रेम दिखा रहा था शायद ये क्षण उनके जीवन के सबसे कठिन क्षणों में से एक था भले ही आज वो अपने खेल जीवन से संतुष्ट लगे परन्तु क्रिकेट से अलग होने का दर्द उनकी वाणी में साफ़ दिखा रहा था किसी खिलाडी का अपने खेल की प्रति इतना प्रेम इतना सम्मान उसे सभी श्रेअनियो से अलग खड़ा कर देता है |

सचिन को जितना सम्मान क्रिकेट की बदोलत मिला सचिन ने नतमस्त होकर खेल को भी उतना सम्मान दिया | आज सचिन और क्रिकेट एक दूसरे के पर्याय है ये कहना अतिशुक्ति न होगी | सचिन के साथ क्रिकेट में सच-इन हुआ था आज सच-आउट हो रहा है भद्र पुरुषों के खेल में एक सच की पारी का ये अंत है… एक सुखद अंत| सचिन का “इन” रहना खेल में भद्रता की गारंटी रहा और जब तक क्रिकेट को भद्र पुरुषों का खेल कहा जायेगा ..सच-“ईन’ रहेगा भले ही आज सचिन-आउट हो रहे हो | खेल में भद्रता लाने के लिए ..और उन सब पलो के लिए जब तुम्हारी भद्रता से भारत को दुनिया ने जाना … धन्यवाद सचिन |



Rahul Bhandari is Editor of TheNewsHimachal and has been part of the digital world for last eight years.