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Thursday 30 March 2017
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modern दीपावली का modern निबंध

दीपावली … ये लाइट का फेस्टिवल है … दिवाली से 5 दिन पहले एमजोन … फिल्फ़्कर्ट … स्नेपडेल जैसी ऑनलाइन कंपनी मजेदार ओफ्फर देती है खास तौर से एलेक्ट्रोनिक आइटम्स पर जैसे मोबाइल और एलईडी टीवी l इस हफ्ते से पहले ही मिलावटी खोया पकड़ा जाने लगता है और जिस वजह से कोई भी पुराने हलवाई से मिठाई नहीं लेते सिर्फ ड्राई फ्रूट और चकलेट ही गिफ्ट मे दिये जाते है । कुरकुरे वाले ज्यादा स्वीट के लिए मना करते है तो पड़ोस के अंकल हॅप्पी दिवाली बोल कर अब कुरकुरे का पेकेट थमा जाते है ।

दिवाली से कुछ दिन पहले एनजीओ वाले अंकल हमे “सै नो टू क्रेकर “ गो ग्रीन दिवाली “ की तख्तियाँ लेकर बाज़ार मे घुमाते है, इस दिन कुछ बुरे लोग पार्टी नहीं करते न ही शराब पीते है फिर इंजाय नहीं करते , ऐसा नहीं करना चाहिए दिवाली फिजूलखर्ची का त्योहार है अगर आपकी पास पैसे नहीं भी हो तो भी दुकान वाले जेरो परसेंट पर फेनाइस्स करते है फिर भी कई बुरे लोग न ही बड़े टीवी लेते है न स्मार्ट फोन ये बहुत ही गलत बात है , इस दिन भगवान राम रावण का वध करके अयोध्या वापस आए थे पर हम उस दिन श्री राम की कोई पूजा नहीं करते पूजा लक्ष्मी माता की ही की जाती है और धनतेरस के दिन तो सोना लेना ही पड़ता है चाहे हमे उधर ही क्यूँ न लेना पड़े , जब हम बाज़ार पटाखे खरीदने जाते है तो एन जी ओ वाले अंकल भी पटाखे खरीदे हुए मिलते है … वो कहते है “ सै नो टू क्रेकर “ तो उनका काम है हमे तो शगुन के लिए पटाखे बजाने ही बजाने है ।

मेरे सभी फ्रेंड्स जो उनके एनजीओ मे साथ है वो बहुत सारे पटाखे खरीदते है और अगले दिन फ़ेसबूक पर अपनी पिक्स अपलोड भी करते है । दिवाली मतलब एंजॉयमेंट इस दिन बहुत सारी शापपिंग करनी चाहिए आजकल ऑनलाइन इतने अछे आफ़र होते है हम सब को दिलखोल कर शॉपिंग करनी चाहिए यही दिवाली का फेस्टिवल का थीम है ।

हॅप्पी दिवाली टू आल … बुरा न मानो दिवाली है
शुभकामनाओ सहित
#बेबाककलम



Rahul Bhandari is Editor of TheNewsHimachal and has been part of the digital world for last eight years.